आनन्द मनाने की सामर्थ्य

आनन्द मनाने की सामर्थ्य

सम्पूर्ण बाइबल में परमेश्वर ने अपने लोगों को निर्देश दिया है कि वे आनन्द मनाएं और हर्ष से भरे रहें। उदाहरण के लिये फिलिप्पियों 4:4 बताता है:

प्रभु में सदा आनन्दित रहो (हर्षित, प्रभु में स्वयं को खुश रखो); मैं फिर कहता हूँ आनन्दित रहो!

जब कभी परमेश्वर दो बार किसी चीज को करने को कहते है जैसे इस पद में पौलुस फिलिप्पियों की कलिसिया को दो बार आनन्दित रहने को कहता है-तो हमें सतर्कता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है कि वह क्या कह रहा है।

पौलुस आनन्दित रहने की शक्ति को जानता था। जब पौलुस और सिलास फिलिपुस के कैदखाने में थेः

…आधी रात के लगभग पौलुस और सिलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे…कि इतने में एकाएक बड़ा भूकम्प आया, यहाँ तक कि बन्दीगृह की नींव हिल गई, और तुरन्त सब द्वारा खुल गए; और सब के बन्धन खुल पड़े। प्रेरितों 16:25,26

वही शक्ति जिसने दरवाजों को खोल दिया और पौलुस तथा सिलास के बन्धनों तथा उनके बन्द कैदियों के बन्धनों को खोल दिया वही शक्ति आज उन सब के लिए उपलब्ध है जो आज उदासी की बीमारी के शिकंजों में कैद और जकड़े है।

बहुत बार लोग यह शब्द सुनते हैं कि आनन्दित रहो और सोचते हैं कि “यह तो बहुत अच्छा है परन्तु हम कैसे आनन्दित हो?” वे आनन्दित होना चाहते है परन्तु उन्हें नहीं मालूम कैसे?

पौलुस और सिलास जिन्हें पीटा गया था, जेल भेजा गया था और इनके पैरों को काठों में ठोका गया था, वे आनन्द मना रहे थे साधारण रूप से परमेश्वर के भजन के गीत गाकर। हम कभी कभी केवल मुस्कराने, हँसने, और स्वयं में प्रसन्न होने के द्वारा जो उत्पल होती है उसका पूरा आंकलन नहीं कर सकते और यही शक्ति आनन्द मनाने की सामर्थ्य है। और इस प्रकार करने से समस्या अपने आप दूर चली जाती है!

उस समय जब मैं उदासी की बीमारी पर बोलने की तैयारी कर रही थी और जब परमेश्वर ने सिनेमा पटल पर दिखाई गई तस्वीर की तरह मुझे सब कुछ स्पष्टता से दिखाया था तब उन्होंने कहा “लोग हर प्रकार की सलाह के लिए आते है क्योंकि वे उदासी से पीड़ित हैं। जब लोग उदास होने लगें तो बस मुस्कराना शुरू कर दें तो उदासी जाती रहेगी। अधिकतर लोग यह समझ नहीं पाते है कि इसी तरीके से वे अपनी परिस्थितियों को बदल सकते हैं।”

अपनी परिस्थितियों के प्रतिक्रिया में साधारण सा तालमेल बैठाने का परणिाम ही परिवर्तन है। परमेश्वर कह रहे थे “यदि वे थोड़ा मुस्कराएँ या एक गाना मेरे लिए गाएँ तो उनकी उदासी दूर हो जाएगी। यदि वे थोड़ा हँसे तो उदासी उन पर ठहर ही नही सकती। जैसे ही उदासी शुरू हो, यदि वे तुरन्त इस प्रकार से प्रतिक्रिया करें अर्थात् मुस्कराने लगें या गाने लगें तो उनका निरूत्साह उन्हें छोड़ कर चला जाएगा।”

वचन भी इसी प्रकार की शिक्षा देता है। भले ही इससे पहले हमने आनन्दित रहने की शिक्षा को इस दृष्ठिकोण से न देखा हो!

आनन्द आत्मा का एक फल है।

“पर आत्मा (पवित्रात्मा) का फल (वह कार्य जो हमारे अन्दर पवित्रात्मा के वास के द्वारा पूरा होता है।) प्रेम, आनन्द (हर्ष), शान्ति, धीरज (धैर्य) कृपा, भलाई (दया), विश्वास, नम्रता (दीनता), और संयम (आत्मा-नियंत्रण) है। ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नही है।” गलातियों 5:22,23

यदि यीशु मसीह से आपका व्यक्तिगत सम्बन्ध है यदि आपने उद्धार प्राप्त किया है तो पवित्रात्मा आपके अन्दर निवास करता है (यूहन्ना 14:16,17; 1 कुरिन्थियों 12:3)। यदि आनन्द आत्मा का फल और आनन्द आप मे है तो आनन्द आपके अन्दर है। आप आनन्द प्राप्त करने की यह निर्माण करने की कोशिश नही कर रहे हैं-यह आपके अन्दर विद्यामान है वैसे ही जैसे आपके अन्दर प्यार करने की योग्यता है और अन्य फल भी आपके अन्दर है क्योंकि पवित्रात्मा आपके अन्दर है।

यह समझना अति आवश्यक है कि हम विश्वासी आनन्द प्राप्त करने की कोशिष नही करते हैं, आनन्द हमारे पास है और अपने अन्दर है । आनन्द को किस प्रकार खोजना है यह सीखना है।

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