यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। – मरकुस 10:18
अवास्तविक उम्मीदें शीघ्र ही हमारी शांति और आनन्द को चोरी कर सकती है। हम आम तौर पर सिद्ध लोगों के साथ, हमारे सिद्ध संसार में सिद्धता से प्रसन्न होते एक सिद्ध दिन की उम्मीद रखते है, पर हम सब जानते है कि यह वास्तविकता नहीं है। केवल परमेश्वर सिद्ध है और बाकी हम सब उसकी तरफ बढ़ रहे है।
शैतान जानता कि क्या हमारी शांति को चोरी करता है और जब हमारी अवास्तविक उम्मीदें पूरी नहीं होती तो हमें निराश करने का प्रबन्ध करता है।
कई साल तक शैतान को मेरी शांति चोरी करने की अनुमति देने के बाद, मुझे अंत समझ आया; जीवन सिद्ध नहीं है, और वो बातें होती है जिनकी हमने योजना नहीं बनाई और जिन में से होकर हम जाना नहीं चाहेंगे। मेरा रवैया यह बन गया है, ओह ठीक, यही तो जीवन है! मैंने यह खोजा कि अगर मैं उन बातों को स्वयं को प्रभावित नहीं करने देती, तो वो मुझे निराश भी नहीं कर सकती।
हर किसी को असुविधाओं के साथ निपटना पड़ता है, पर हम उनको हल कर सकते और एक बुरे रवैये से बच सकते है। आज याद रखें कि केवल परमेश्वर सिद्ध है और उस में भरोसा करना सीखें। वह सदैव आपके अतीत की निराश परिस्थितियों से बाहर, आपको ताकत देते और आपकी शांति कायम रखने में आपकी सहायता करते आपकी अगुवाई कर सकता है।
आरंभक प्रार्थना
परमेश्वर, केवल आप ही सिद्ध है। मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि जब लोग और परिस्थितियां असफल करती, तब आप ऐसा कभी नहीं करते हैं। उन बातों पर मेरी आशा रखने की बजाए, जो कि निराश करेंगी, मैं एक शांति के जीवन को चुनती हूँ जो केवल आप में भरोसा रखने से आता है।