क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! – भजन संहिता 1:1
समाज के नैतिक पतन से ऊपर जीवन व्यतीत करने में वो चुनाव शामिल होते जो हम हमारी बातचीत के संबंध में, हमारे कपड़े पहनने के ढंग, जो हम पढ़ते, और टी. वी. शो और फिल्में जो हम देखते के संबंध में करते है। इसका संबंध हमारी ईमानदारी के स्तर के साथ भी होता है जिसके द्वारा हम हमारे व्यक्तिगत जीवनों को व्यतीत करते है, अन्य लोगों के साथ संपर्क करते और हमारे व्यापार या पेशे में स्वयं को पेश करते है।
मसीही होते हुए, हमें धर्मी मापदंड के द्वारा जीवन व्यतीत करने के लिए एक दूसरे को उत्साहित करना चाहिए और संसार के आर्कषण का सामना करना चाहिए। एक बहुत ही प्रसिद्ध उद्धरण अच्छी सलाह देता हैः “अपने विचारों की निगरानी करो, क्योंकि यह शब्द बनते है। अपने शब्दों की निगरानी करो, क्योंकि वह आपकी क्रियाएं बन जाते है। अपनी क्रियाओं की निगरानी करो, क्योंकि वह चरित्र बन जाते है। अपने चरित्र की निगरानी करो, क्योंकि वह आपकी मंजिल बन जाते है।”
मानवजाति के लिए परमेश्वर के महान उपहारों में से एक है, चुनाव करने की आजादी है। अगर हम उन आशिषों का आनन्द लेना चाहते है जो उसके पास हमारे लिए है, तो हमें ऐसे जीवनशैली के चुनाव करने की आवश्यकता है जो उसके वचन के साथ मेल खाते और उसके वचन के मूल्यों के साथ मिलते है, नाकि उन चुनावों के साथ जो संसार के निरंतर पतन होते मूल्यों के साथ नष्ट प्रतिबिंद होते है।
मैं आपको पूरी तरह से परमेश्वर की सेवा करने के लिए, सब जो आप करते उसमें उसे पहले स्थान पर रखने का निर्णय लेने की विनती करती हूँ।
आरंभक प्रार्थना
परमेश्वर, मैं संसार के मापदंडो के अनुसार जीवन नहीं व्यतीत करना चाहती हूँ। मैं मेरे जीवन में आपको पहले स्थान पर रखती हूँ, क्योंकि मैं जानती हूँ कि आपके मार्ग उत्तम है।