परमेश्वर की विधि से जीएं

हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर [पूरी तरह से, श्रद्धा से], कि मैं तेरे नाम का भय मानूं । (भजन संहिता 86:11)

यदि हम परमेश्वर की आवाज सुनते हैं और परमेश्वर के मार्ग के अनुसार जीते हैं, यदि हम उसकी सेवा करना चुनते हैं, तो हम उसके साथ लंबी कुश्ती प्रतियोगिताओं से बच सकते हैं। बुद्धि हमें बताती है कि परमेश्वर को हमारे साथ वही करने देना चाहिए जो वह चाहता है ताकि हम हर समय उसी “पर्वत” के इर्द-गिर्द घूमते ना रहें (देखें व्यवस्थाविवरण 2:3)। मैं ऐसे लोगों से मिली हूं जो बीस या तीस वर्षों से एक ही बाधाओं और मुद्दों से निपट रहे हैं। यदि वे आरंभ में ही परमेश्वर की मान लेते, तो वे बहुत पहले ही अपने जीवन में आगे बढ़ जाते।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम उस जगह का कितना आनंद लेते हैं जहां हम उस समय हैं जब परमेश्वर ने हमें ढूंढा था, वह हमें वहां रहने और ठहरने नहीं देगा। उसके पास नई जगहें हैं जहाँ वह हमें ले जाना चाहता है, और उसके पास नए सबक हैं जो वह हमें सिखाना चाहता है। वह हमें जीवन से भरा, विकास से भरा और उसके उद्देश्यों और योजनाओं से परिपूर्ण रखना चाहता है।

परमेश्वर ने हमें कहा है, “यदि तुम मुझ पर ध्यान नहीं देते हो, यदि तुम मुझे अनदेखा करते हो और मेरी फटकार पर ध्यान नहीं देते हैं, तो मैं तुम्हारे ध्यान आकर्षित करूंगा। मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूंगा, लेकिन अगर तुम मेरी बात नहीं सुनते, तो तुम मुश्किल में पड़कर घबराए हुए मेरे पास आओगे” (नीतिवचन 1:24-28 देखें)। परमेश्वर दयालु और सहनशील है, लेकिन एक समय आता है जब हमें यह महसूस करना चाहिए कि हमें उसके प्रति आज्ञाकारी होने की आवश्यकता है। जितनी जल्दी हम उसका पालन करना शुरू करते और परमेश्वर के विधि के अनुसार जीना शुरू करते हैं, उतनी ही जल्दी हम अपने जीवन को आगे बढ़ा सकते हैं और परमेश्वर की अच्छी योजनाओं में आगे बढ़ सकते हैं।

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आज आप के लिए परमेश्वर का वचनः

प्रार्थना करें, आज्ञा मानें, और देरी ना करें!

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