…क्योंकि हमें यह हियाव नहीं कि हम अपने आप को उन में से ऐसे कितनों के साथ गिनें, या उन से अपने को मिलाएं, जो अपनी प्रशंसा करते हैं, और अपने आप को आपस में नाप तौलकर एक दूसरे से मिलान करके मूर्ख ठहरते हैं। – 2 कुरिन्थियों 10:12
भीड़ की बजाए परमेश्वर के पीछे चलने के लिए साहस की जरूरत होती है। जो दूसरे सोचते हैं उसके बारे में बेहद चिंतित होना हमें केवल कष्ट में ही ले जाता है। हालांकि हम सब आनन्दित महसूस करते हैं जब हमारे बारे में अच्छा सोचा जाता है, हर समय प्रत्येक के द्वारा पसंद किया जाना संभव नहीं है।
परमेश्वर के अर्थप्रबन्ध में, हमें आम तौर पर जो हम जीवन में असल चाहते है को पाने के लिए कुछ खोने की आवश्यकता होती है, और उसका अर्थ है कि हमें दूसरे लोगों के मापदंडो के साथ स्वयं की तुलना करना बंद करना और परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करना आरम्भ करना है।
आपके सच्चे दोस्त, सब जो परमेश्वर चाहता कि आप बने वो होने के लिए सहायता करेंगे। वह परमेश्वर की बुलाहट पर चलने का आपको दोष नहीं देंगे। वास्तविक दोस्त आपको आपके जीवन में परमेश्वर को पहले स्थान पर रखने में उत्साहित करेंगे।
यहां तक कि, कोई आपको छोड़कर भी चला जाता है तब भी वह आपको कभी न छोड़ने ना त्यागने का वायदा करता है।
जब हम परमेश्वर और लोगों दोनों को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं तो जीवन बहुत जटिल, उलझन से भरा और निराश करने वाला हो जाता है। आपको स्वयं की किसी अन्य के साथ तुलना करने और लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करें और जो होने के लिए उसने आपको बनाया वो होने के लिए आजाद हों।
आरंभक प्रार्थना
प्रभु मैं अभी इस समय केवल आपके लिए जीवन व्यतीत करने का निर्णय करती हूँ। अन्य लोगों के मापदंडो और उम्मीदों के लिए जीवन व्यतीत करना मुझे कहीं नहीं ले जाएगा। केवल आप ही मायने रखते है, और मैं वो व्यक्ति बनना चाहती हूँ जो होने के लिए आपने मुझे बनाया है।