आगे बढ़ते रहें

हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं {अभी तक}; परन्तु केवल यह एक काम करता हूं {यह मेरी एक आकांक्षा है,} कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह {परम और स्वर्गीय,} इनाम पाऊं, जिसके लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। (फिलिप्पियों 3:13-14)

परमेश्वर के साथ हमारे रिश्ते प्रगतिशील हैं और हम सभी एक स्तर से दूसरे स्तर पर आगे बढ़ते हैं। कोई भी कभी भी परमेश्वर के साथ संचार में कुशल बन सकते हैं क्योंकि उसके साथ संबंध की गहराई की कोई सीमा नहीं है; यह बस बढ़ता रहता है, गहरा होता रहता है, मजबूत होता रहता है। समय के साथ उसकी आवाज सुनने की हमारी क्षमता विकसित होती जाती और सुधरती जाती है। समय के साथ और अभ्यास के साथ, हम परमेश्वर के साथ अपने दिल की बात साझा करने में बेहतर हो जाते हैं और हम उनकी आवाज सुनने और समझने के लिए अधिक कुशल और अनुभवी बन जाते हैं कि वह हमसे क्या कह रहे हैं। हम प्रार्थना में कभी भी विशेषज्ञ नहीं बनते हैं और हम कभी भी परमेश्वर के साथ संवाद करना नहीं छोड़ते हैं; हमारे अनुभव बस समृद्ध और बेहतर होते रहते हैं।

परमेश्वर के पास आपके लिए बहुत कुछ है, और यद्यपि आप अपने अंतिम गंतव्य पर नहीं पहुंचे हैं, आप परमेश्वर को धन्यवाद दे सकते हैं कि आप उस मार्ग पर हैं जो आपको वहां ले जाएगा। जब तक आप प्रगति कर रहे हैं, तब तक वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप रेंग रहे हैं, चल रहे हैं, या दौड़ रहे हैं। बस आगे बढ़ते चलें!

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आपके लिए आज का परमेश्वर का वचनः

आप ठीक हैं और आप अपने रास्ते पर हैं।

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